मुकेश जैन की रिपोर्ट
Kanker News : सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन के तहत गांव-गांव तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट नजर आ रही है। ऐसा ही एक मामला चारामा ब्लाक के ग्राम पंचायत रानीडोंगरी के आश्रित ग्राम टिकरापारा में सामने आया है, जहां लाखों रुपए की लागत से पानी टंकी का निर्माण, पाइपलाइन बिछाने और घर-घर कनेक्शन देने का कार्य तो कागजों में पूर्ण दिखाया जा चुका है, लेकिन आज तक ग्रामीणों को एक बूंद पानी नसीब नहीं हो पाया है।
जानकारी के अनुसार इस पेयजल योजना का कार्य 28 मार्च 2023 को पूर्ण होना दर्शाया गया है। संबंधित कार्य एजेंसी के रूप में जगरू राम पासवान का नाम सामने आया है, वहीं यह योजना जल जीवन मिशन (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग) के माध्यम से संचालित की गई। कागजी अभिलेखों में गांव में पेयजल आपूर्ति शुरू होना भी बताया जा रहा है, लेकिन हकीकत में स्थिति बिल्कुल विपरीत है।
टेस्टिंग के बाद ठप पड़ी योजना
ग्रामीणों का कहना है कि पानी टंकी का उपयोग केवल प्रारंभिक टेस्टिंग के दौरान ही किया गया। उसके बाद से आज तक इस टंकी से नियमित जल आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। सबसे गंभीर बात यह है कि बोरवेल से टंकी का स्थायी कनेक्शन भी नहीं किया गया है, जिससे पूरी योजना अधूरी अवस्था में ही छोड़ दी गई है।
भीषण गर्मी में बूंद-बूंद को तरस रहे ग्रामीण
भीषण गर्मी के इस मौसम में टिकरापारा के ग्रामीण पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। जहां एक ओर सरकार हर घर जल पहुंचाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों को रोजमर्रा के उपयोग के लिए भी पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाने को मजबूर हैं।
“निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल, पानी टंकी हुई तिरछी”
ग्राम टिकरापारा में लाखों रुपए की लागत से निर्मित पानी टंकी अब तिरछी होती नजर आ रही है। प्रारंभ में सीधी बनी यह टंकी समय के साथ झुकाव की स्थिति में पहुंच गई है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
झाड़ियों में छिपा पंप हाउस और बदहाल टंकी
स्थल निरीक्षण में यह भी सामने आया कि पानी टंकी और पंप हाउस के आसपास साफ-सफाई का अभाव है। पूरा परिसर झाड़ियों से घिरा हुआ है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि लंबे समय से यहां कोई रखरखाव कार्य नहीं किया गया है। जबकि नियमों के अनुसार ठेकेदार को निर्माण के बाद निश्चित अवधि तक (आमतौर पर 5 वर्ष) रखरखाव की जिम्मेदारी निभानी होती है।
टूटे नल, अधूरे कनेक्शन और शून्य आपूर्ति
गांव में कई स्थानों पर नल टूटे हुए पाए गए हैं, वहीं कुछ घरों तक अब तक पाइप कनेक्शन भी नहीं पहुंच पाया है। जिन घरों में कनेक्शन दिया गया है, वहां भी पानी की सप्लाई न होने के कारण नल केवल शोपीस बनकर रह गए हैं।
कागजों में पूर्ण, जमीन पर अधूरा
रिकॉर्ड में योजना को पूर्ण और क्रियाशील दर्शाया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता यह है कि ग्रामीणों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। इससे योजना की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
“निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल, पानी टंकी हुई तिरछी”
ग्राम टिकरापारा में लाखों रुपए की लागत से निर्मित पानी टंकी अब तिरछी होती नजर आ रही है। प्रारंभ में सीधी बनी यह टंकी समय के साथ झुकाव की स्थिति में पहुंच गई है, जिससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिम्मेदारी से पीछे हटता तंत्र
ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा केवल निर्माण कार्य दिखाकर राशि निकाल ली गई, लेकिन रखरखाव और संचालन की जिम्मेदारी नहीं निभाई जा रही है। विभागीय स्तर पर भी निगरानी की कमी साफ दिखाई दे रही है।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर नजर
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या संज्ञान लेता है । साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि क्या ग्रामीणों को समय रहते पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी या वे यूं ही पानी के लिए तरसते रहेंगे। यह पूरा मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि क्या सरकारी योजनाएं केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगी, या वास्तव में उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा।
हर घर तक जल पहुंचे इसके लिए प्रशासन बिल्कुल ही प्रयास कर रही है, ग्राम टिकरापारा का मामला संज्ञान में है जल्द ही ग्रामीणों के घर-घर तक पानी पहुंचाया जाएगा।
- राजेश हिरकने, एसडीओ।
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