कांकेर ने रचा इतिहास: 2217 आजीविका डबरियों का निर्माण, प्रदेश में बना नंबर-1 जिला

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कांकेर : छत्तीसगढ़ के जिले ने जल प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। शासन की महत्वाकांक्षी योजना ‘मोर गांव, मोर पानी’ महाभियान के तहत जिले में अब तक 2217 आजीविका डबरियों का निर्माण किया जा चुका है, जो पूरे प्रदेश में सर्वाधिक है।

कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के मार्गदर्शन में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के अभिसरण से यह कार्य तेजी से पूरा किया गया। इस पहल ने ग्रामीणों के लिए आय के नए अवसर भी खोल दिए हैं।

 क्या है आजीविका डबरी?

आजीविका डबरी का मुख्य उद्देश्य वर्षा जल को संग्रहित करना, भूजल स्तर को बढ़ाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। इन डबरियों के माध्यम से अब ग्रामीण मछली पालन, सब्जी उत्पादन और फलदार वृक्षारोपण जैसे कार्य कर पा रहे हैं।

चयन में इनको मिली प्राथमिकता

डबरी निर्माण के लिए चयनित हितग्राहियों में विशेष रूप से:

  • लखपति दीदी
  • प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थी
  • नक्सल प्रभावित परिवार को प्राथमिकता दी गई।

 वैज्ञानिक तरीके से चयन

डबरी निर्माण के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया।

  • GIS (Geographic Information System)
  • CLART ऐप
  • वाटरशेड सिद्धांत

इनके माध्यम से ऐसे स्थानों का चयन किया गया, जहां अधिकतम जल संचयन संभव हो।

 विकासखण्डवार डबरी निर्माण

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरेश मंडावी के अनुसार:

  • अंतागढ़ – 349
  • भानुप्रतापपुर – 353
  • चारामा – 143
  • दुर्गूकोंदल – 342
  • कांकेर – 355
  • कोयलीबेड़ा – 227
  • नरहरपुर – 448
  • कुल – 2217 आजीविका डबरियां (प्रदेश में सर्वाधिक)

     किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

    बारिश के बाद इन डबरियों में जल भराव से:

    • सिंचाई सुविधा बढ़ेगी
    • भूजल स्तर में सुधार होगा
    • कुओं और हैंडपंपों में पानी उपलब्ध रहेगा

कांकेर जिले का यह मॉडल जल संरक्षण और ग्रामीण विकास का एक सफल उदाहरण बनकर उभरा है, जिसे भविष्य में प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है।


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